संत शिरोमणि रविदास - Sant Siromani Ravidas Songs Hindi
अप्पाला प्रसाद
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संत शिरोमणि रविदास,
भगवत्-भक्त थे रविदास।
समरसता की साकार मूरत,
प्रेम-भक्ति थे रविदास॥
रामानंद गुरु की शिष्य-परंपरा में,
विनयवान थे रविदास।
गुरु-संदेश और भक्ति-वाणी,
जन-जन तक पहुँचाई रविदास॥
संत शिरोमणि रविदास,
भगवत्-भक्त थे रविदास॥
मानवता और समता का दीप,
हृदयों में जलाया।
कुरीतियों के तम को हरकर,
भक्ति-पथ दिखलाया॥
तेरह सौ सतहत्तर में,
पावन काशी धाम।
माघ पूर्णिमा, रविवार के दिन,
अवतरे संत महान॥
संत शिरोमणि रविदास,
भगवत्-भक्त थे रविदास॥
माता-पिता की सेवा की,
लोना देवी से ब्याह रचाया।
संत कबीर के समकालीन बनकर,
भक्ति-आंदोलन चलाया॥
हरि-नाम का जप करते-करते,
पावन कर्म निभाए।
चरण-पादुका बनाते हुए भी,
साधु-संतों की सेवा की॥
संत शिरोमणि रविदास,
भगवत्-भक्त थे रविदास॥
निर्मल मन की कठौती में,
कंगन प्रकट कराया।
धन देने वाली पारस-मणि को,
सहज भाव से ठुकराया॥
हरि-नाम को महाधन माना,
भक्ति को जीवन सार।
त्याग, सेवा और सत्य-कर्म से,
कर दिया जीवन साकार॥
संत शिरोमणि रविदास,
भगवत्-भक्त थे रविदास॥
पंद्रह सौ चौरासी में,
चित्तौड़ की पावन धरती पर।
मीराबाई और रानी झाली,
शरण आईं गुरु चरणों पर॥
जन्म नहीं बनाता महान किसी को,
सदाचार ही सच्ची शान।
ध्यान-प्राणायाम, भक्ति-साधना से,
पाया मुक्ति का पावन ज्ञान॥
संत शिरोमणि रविदास,
भगवत्-भक्त थे रविदास।
समरसता की साकार मूरत,
प्रेम-भक्ति थे रविदास॥
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